Pallavi Goel
Abstract Inspirational
सृष्टि और संत...
मौन
ज़िंदगी तेरा ...
स्वर साम्राज्...
जीवन अपने सम
आँसू
गणतंत्र दिवस-...
बस यूँ ही
आर्य माता
वैसे तो
माँ ने दिया है प्यार दुलार तो पापा ने संस्कार दिया। अंधेरे में न कहीं भटकूँ हर अंधकार को दूर किया... माँ ने दिया है प्यार दुलार तो पापा ने संस्कार दिया। अंधेरे में न कहीं भटकूँ ह...
अभी तो ज़िंदगी जी नहीं अभी तो कर्तव्य का चोला पहना ज़िम्मेदारी का है दामन थामा अभी तो ज़िंदगी जी नहीं अभी तो कर्तव्य का चोला पहना ज़िम्मेदारी का है दामन...
बीवी के लिए माँ बाप को उनके ही घर से बाहर निकाल देते है बीवी के लिए माँ बाप को उनके ही घर से बाहर निकाल देते है
एक पाथेय सबके जीवन के बाद होता ही है। एक पाथेय सबके जीवन के बाद होता ही है।
मत बाँधिए नियमों की जंज़ीरों से, आज़ाद जीना चाहती हूँ मैं; मत खींचिए कोई लक्ष्मण रेखा, बेखौ... मत बाँधिए नियमों की जंज़ीरों से, आज़ाद जीना चाहती हूँ मैं; मत खींचिए कोई ल...
माँ की ममता होती है अनमोल, उसका नहीं है कोई और मोल। माँ की ममता होती है अनमोल, उसका नहीं है कोई और मोल।
उससे अच्छा तो कल रात वाला चाँद था जो मुझसे कितनी बात करता था। उससे अच्छा तो कल रात वाला चाँद था जो मुझसे कितनी बात करता था।
इस बात का एहसास पंखे कूलर और ए.सी. में बैठकर नहीं किया जा सकता उसकी प्रताड़ना की पीड़ा को कतई न... इस बात का एहसास पंखे कूलर और ए.सी. में बैठकर नहीं किया जा सकता उसकी प्रता...
तब भी यह एहसास था कि सामने वाला सुनना नहीं चाहता, उसे कोई दिलचस्पी नहीं है, हो भी क्यूँ ... तब भी यह एहसास था कि सामने वाला सुनना नहीं चाहता, उसे कोई दिलचस्पी नहीं...
जगह- जगह पोस्टर्स लगे हुए हैं, सूखा और गिला कचरा अलग रखें ! पांच ━ छह वर्ष के बच्चे, कचरे में अन्... जगह- जगह पोस्टर्स लगे हुए हैं, सूखा और गिला कचरा अलग रखें ! पांच ━ छह वर्ष के ...
बच्चे कब समझ पाते अपने माँ बाप की भावना ,उनकी परेशानी और जब तक समझते हैं जब खुद उसी जगह खड़े होते है... बच्चे कब समझ पाते अपने माँ बाप की भावना ,उनकी परेशानी और जब तक समझते हैं जब खुद...
बस माँ की आशीष-पाल से, चलती है जीवन नौका। बस माँ की आशीष-पाल से, चलती है जीवन नौका।
यह तो एक सुखद उपवन है, कलयुग के कहरों में। यह तो एक सुखद उपवन है, कलयुग के कहरों में।
वो बचपन के दिन सपनों जैसे झिलमिल। वो बचपन के दिन सपनों जैसे झिलमिल।
है सहनशीलता का एक विशाल स्वरुप उस माँ को मेरा शत शत नमन है। है सहनशीलता का एक विशाल स्वरुप उस माँ को मेरा शत शत नमन है।
भरा होता है कुछ विचित्र आकर्षण। भरा होता है कुछ विचित्र आकर्षण।
इसी आँगन में सभी चहकते थे रातों को आसमान के तारे गिनते हैं हाय डेड के सिवा अब कुछ नहीं होता ... इसी आँगन में सभी चहकते थे रातों को आसमान के तारे गिनते हैं हाय डेड के सिव...
परोपकारी बनने को कहते है ये सिर्फ देते हैं कुछ भी न लेते हैं ये। परोपकारी बनने को कहते है ये सिर्फ देते हैं कुछ भी न लेते हैं ये।
पहले,मैं उसे रोता देख कर परेशान हो जाता था,अब वो अपने मन की खिड़की से मेरे मन में झाँक लेती है ... पहले,मैं उसे रोता देख कर परेशान हो जाता था,अब वो अपने मन की खिड़की से मेरे ...
घर की चाभियों को तो साड़ी के कोर से कस के गिरह बाँध सकती हो ,खो जाने पर इसकी प्रतिलिपि भी बनवा सकती ... घर की चाभियों को तो साड़ी के कोर से कस के गिरह बाँध सकती हो ,खो जाने पर इसकी प्र...