ज़िंदगी मेरी नज़र …
ज़िंदगी मेरी नज़र …
मेरी नज़र में ज़िंदगी
एक कहानी है …
जो एक ना एक दिन सब को सुनानी है …
ये दुनिया यूँ ही चलती रहेगी …
कुछ नए ,कुछ पुराने ,किरदारों
की आनी जानी …. रवानी है ये
जब मुझे भी रचा उसने ..यशवी
क्यूँ ना मैं भी
अपने किरदार की …
आप बीती ब्यां ….. कर जाऊँ
आने जाने वाले को …
हर लम्हे को …
कैसे अपनी तरह जीना है
थोड़ा सा समझा जाऊँ
उस ने भेजा है यहाँ ….
तो उसका दिया काम पूरा कर जाऊँ ….
ज़िंदगी को किसी ने सफ़र ,
किसी ने रास्ता तो किसी ने …
उस ऊपर वाले का उपहार कहा
शायद जिस ने भी ….
जिस तरह से जाना इसे
उसी अन्दाज़ में ब्यां किया …
हाँ रास्ता है ये ….
रुकने के लिए नही …
सच कह के किसी ने …
हमें चलते रहने का पैग़ाम दिया
जिस ने भी इसे सफ़र कहा
बड़ा काम किया ….
हँसते हँसते इसे तय करने का सामान किया
जाते जाते मैंने भी
एक नया नाम दिया है
ना ख़त्म होगी कभी ….
“कहानी”…. है ये ख़िताब दिया
हाँ ये कहानी यूँ ही चलती रहेगी
कल माँ पापा थे ….. आज मैं
कल मेरे बाद मेरे सुंदर चिराग़ होंगे ….
कभी ना ख़त्म होगी यूँ आबाद रहेगी
ये ज़िंदगी मेरी नज़र में एक सुंदर कहानी है
ना ख़त्म होगी कभी ……इस की रवानी है।
