ज़िंदगी बदल गई
ज़िंदगी बदल गई
उनके आने से ज़िंदगी बदल गई,
हाँ! अब तनहाई की शाम ढल गई।
जो छुपाए रखा था दिल में बरसों से,
हर वो बात ज़ुबान से निकल गई।
जिसे कहते थे लोग निकम्मा, आवारा,
हाँ! अब वो ज़िंदगी बहुत सम्भल गई।
उनके आने के बाद, मेरे दिल से
हर ख़्वाहिश, हर तमन्ना निकल गई।
हर मुद्दे पर कई ग़ज़ल लिखी "मुख़्तार" हमने,
एक उन पर लिखने में ज़िंदगी निकल गई।

