STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Inspirational

4  

AVINASH KUMAR

Inspirational

जीवन क्या है?

जीवन क्या है?

1 min
429


मैंने एक फूल से कहा. ..!

कल तुम मुरझा जाओगे 

फिर क्यों मुस्कुराते हो?

व्यर्थ में 

यह ताजगी किसलिए लुटाते हो?


फूल चुप रहा -

इतने में एक तितली आई

पल भर आनंद लिया, उड गई, 


एक भौंरा आया 

गुनगुनाया, सुगंध बटोरी,

और आगे बढ गया,


एक मधुमक्खी आई

पल भर भिनभिनाई

पराग समेटा, 

और झूमती गाती चली गई, 


खेलते हुए एक बालक ने

स्पर्श सुख लिया, रूप-लावण्य निहारा,

मुस्कुराया और खेलने लग गया|


तब फूल बोला-

 || मित्र ||

क्षण भर को ही सही 

मेरे जीवन ने कितनों को सुख दिया 


क्या तुमने भी कभी ऐसा किया?


कल की चिन्ता में 

आज के आनंद को विराम क्यों करूँ!


माटी ने जो रूप, रंग, रस, गंध दिए

उसे बदनाम क्यों करूँ!


मैं हँसता हूँ 

क्योंकि हँसना मुझे आता है, 


मैं खिलता हूँ 

क्योंकि खिलना मुझे सुहाता है, 


मैं मुरझा गया तो क्या

कल फिर एक नया फूल खिलेगा 

न कभी मुस्कान रुकी हैं, 

न......ही रुकेगी ।


जीवन तो एक सिलसिला है

इसी तरह चलता रहेगा |


"खुश रहिये, मुस्कुराते रहिये और अपनों को भी खुश रखिए 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational