जीवन है महोत्सव
जीवन है महोत्सव
तारीखें बदलती ही है हर साल करवटें,
सब ज़िन्दगी जीने का... जज़्बा जगायें;
बहुत कोमल है हृदय... सहेज कर रखें,
यादकर बीती बातों को न दिल दुखायें;
जीवन में छल करने वाले बहुत मिलेंगे,
कभी उनके हाथों न अपनी डोर थमायें;
खुद से भागना आसान तो लगेगा बहुत,
थोड़ा ठहरें खुद ही खुद को गले लगायें;
नीरसता ना जन्में आह्लादित रहे तनमन,
जीवन है एक महोत्सव ...उमंग से मनायें।
