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Kajal Kumari

Inspirational

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Kajal Kumari

Inspirational

-इतनी सी आदमी की औकात

-इतनी सी आदमी की औकात

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एक माचिस का तिनका,

एक घी का डबा और हुमाद

लकड़ियों के बड़े ढेर पे रख

कर कुछ घण्टे में हो गए राख.....

बस इतनी-सी है जिंदगी 

*इतनी सी आदमी की औकात !!!!*

एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया ,

अपनी सारी ज़िन्दगी की कमाई ,

अपने परिवार के नाम कर गया।

कहीं रोने की सुगबुगाहट थी ,

तो कहीं चल रही फुसफुसाहट ,

....अरे जल्दी से ले जाओ अब 

कौन रखेगा इनको सारी रात...

बस इतनी-सी है जिंदगी  

*इतनी सी आदमी की औकात!!!!*

मरने के बाद आत्मा ने नीचे देखा ,

नज़ारे अलग ही नज़र आ रहे थे,

मेरी मौत पे .....

कुछ लोग ज़बरदस्त तरीके से, 

तो कुछ ज़बरदस्ती से

रो रहे थे।

नहीं रहा.. ........चला गया..........

चार दिन तक याद करेंगे और यही करेंगे बात.........

बस इतनी-सी है जिंदगी  

*इतनी सी आदमी की औकात!!!!!*

बेटा अच्छी तस्वीर बनवायेगा ,

सामने अगरबत्ती चार जलायेगा ,

खुश्बुदार फूलों की माला सजी होगी ......

अखबार में छपी

भावपूर्ण श्रद्धांजली होगी.........

बाद में उस तस्वीर पे ,

जाले भी लगेगे मगर कौन करेगा साफ़...

बस इतनी-सी है जिंदगी  

*इतनी सी आदमी की औकात !!!!!!*

जिन्दगी भर सबसे लडा,

तेरा- मेरा- मेरा तेरा किया....

अपने लिए बहुत कम ,

अपनों के लिए तो ज्यादा जीया ...

कोई न देगा यहा साथ...                    

चला जायेगा तू खाली हाथ....

क्या अपने साथ मै एक सुई भी 

ले जाने की भी क्या है 

है हमारी तेरी औकात ???

ये है चार दिनों की जिंदगी                        

इतनी सी आदमी की औकात.             


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