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M BOSS मुस्ताक अली शायर

Abstract

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M BOSS मुस्ताक अली शायर

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इश्के खुदा

इश्के खुदा

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दुनिया बहुत बेरहम हैं

उससे भी बेरहम हैं दुनिया वाले

आप चाहे कितनी भी वफा की माला जपे

आप के हक में सिर्फ बेवफाई ही आएंगी।


अब तो लोगों की फितरत ही हो गई हैं

धोखा देने की।।

किसी को किसी के दर्द का एहसास नहीं।

कोई भी किसी की खुशी की परवाह नहीं करता।।


हर कोई खुद में ही मशगूल हैं।

हर कोई अपने लिए ही जी रहा हैं।

बस खुदा ही हैं

जो वफा का रिश्ता निभा रहा।।

बस वही है जो अपने बंदो से बेइंतहा मोहब्बत करता हैं।।


जमाने की मोह माया छोड़ कर

इश्के खुदा करोगे तो जिंदगी में हमेशा खुश रहोगे।।

छोड़ दी हमने इंसानो से

मोहब्बत करना 

अब ना कोई प्यार की 

रस्म अदा करेंगे

वफा के बदले वफा का वादा हैं

अब हम इश्के खुदा करेंगे।।


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