aayushi narayan
Romance
हर सुबह मेरे इश्क में इज़ाफा करती है
तेरी यादें कुछ इस तरह मेरी रातोंं को
मुक्कमल करती हैं
इश्क में इज़ा...
इश्क में इजा़...
इश्क में इज़ा...
हम तेरे है रे मीत इस द्वैत का अद्वैत हैं हम ! हम तेरे है रे मीत इस द्वैत का अद्वैत हैं हम !
राधा-कृष्ण जैसा पावन प्रेम, हर प्रेमी व प्रेमिका को भाता है... खुद की तुलना वह उनसे भी करते है... नि... राधा-कृष्ण जैसा पावन प्रेम, हर प्रेमी व प्रेमिका को भाता है... खुद की तुलना वह उ...
आशिक़ी में हुए दीवाने तेरे बिन फेरें हम तेरे आशिक़ी में हुए दीवाने तेरे बिन फेरें हम तेरे
इसके होने से या ना होने से भी धरती नहीं हिलेगी हमारी ये सिंदूरी रेखा मेरे केशों से। . इसके होने से या ना होने से भी धरती नहीं हिलेगी हमारी ये सिंदूरी रेखा मेरे ...
चाँद को रब ने तराशा तेरी मूरत बन गई। चाँद को रब ने तराशा तेरी मूरत बन गई।
पर तेरे संग बिताए लम्हों ने ने रुला दिया पर तेरे संग बिताए लम्हों ने ने रुला दिया
तो माफी मांग लेना तुम कभी प्यार जताना ऐसे तुम। तो माफी मांग लेना तुम कभी प्यार जताना ऐसे तुम।
अँगुली पकड़कर जगत की राह पर चलते हो अँगुली पकड़कर जगत की राह पर चलते हो
आगोश में छुपकर तेरे तन पिघलता है। आगोश में छुपकर तेरे तन पिघलता है।
मेरी दुनिया इन्ही आंखों में सिमट आई शेख़, अब ये हसरत ना रही हमको ज़माना देखे... मेरी दुनिया इन्ही आंखों में सिमट आई शेख़, अब ये हसरत ना रही हमको ज़माना देखे...
क्यूँ ना अपनी उलझने सुलझायें फिर से ? क्यूँ ना अपनी उलझने सुलझायें फिर से ?
मेरी हर नादानी को माफकर बस मेरे पास ही रह जाना। मेरी हर नादानी को माफकर बस मेरे पास ही रह जाना।
भोजपूरी और हिंदी दोनो जैसे बहनें... तो यह है भोजपूरी गीत आप सबके लिए... भोजपूरी और हिंदी दोनो जैसे बहनें... तो यह है भोजपूरी गीत आप सबके लिए...
तुम्हारे दूर जाते ही खारी-खारी, बूंदें भी जैसे लुप्त हो जाती है, ठीक उस तरह; जैसे सूरज के अवसान पर, ... तुम्हारे दूर जाते ही खारी-खारी, बूंदें भी जैसे लुप्त हो जाती है, ठीक उस तरह; जैस...
हल्दी का सुर्ख हुआ चेहरा, अलसाई धूप में ! हल्दी का सुर्ख हुआ चेहरा, अलसाई धूप में !
फिर भी तेरी याद अपने संग इस नए घर में ले आया। फिर भी तेरी याद अपने संग इस नए घर में ले आया।
हमारे तुम्हारे बीच के पुल पर आलिंगनबद्ध इस पल की तरह। हमारे तुम्हारे बीच के पुल पर आलिंगनबद्ध इस पल की तरह।
तुम मेरे मन का बसंत यूं ही बने रहना मेरी आत्मा ! तुम मेरे मन का बसंत यूं ही बने रहना मेरी आत्मा !
साथी तेरा साथ एक बरगद की छाँव सा, मिला मन को मेरे जब से सुकून अब राह के काँटों से है साथी तेरा साथ एक बरगद की छाँव सा, मिला मन को मेरे जब से सुकून अब राह के...
न कोई सीमा, न कोई बंधन, बस प्रेम ही मेरा स्वर्ण धन। न कोई रीत, न कोई अनबन, तुमसे ह न कोई सीमा, न कोई बंधन, बस प्रेम ही मेरा स्वर्ण धन। न कोई रीत, न कोई अ...