Priyanka Gupta
Romance
पल दिनों में बदले,
थमना है
थमना
ठहर जाना
प्रेमविहीन जी...
खुराक सपनों क...
सहअस्तित्व
वर्तमान
कभी सोचा नहीं
तुम्हारा साथ ...
याद आते हो
जिंदगी का हर पग तुम्हें मैं अर्पित करना चाहती हूँ। जिंदगी का हर पग तुम्हें मैं अर्पित करना चाहती हूँ।
अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में। अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में।
मैंने कभी नहीं मांगा था हाथ तुम्हारा साथ तुम्हारा मैंने कभी नहीं मांगा था प्रीत तुम। मैंने कभी नहीं मांगा था हाथ तुम्हारा साथ तुम्हारा मैंने कभी नहीं मांगा था ...
पर जीवन की संध्या बेला में ये एहसास चरम पर होता है ।। पर जीवन की संध्या बेला में ये एहसास चरम पर होता है ।।
तुम जाते जाते ले गये.. मुझसे मेरी साँझ की तसल्ली.. तुम जाते जाते ले गये.. मुझसे मेरी साँझ की तसल्ली..
बस तुम यूं ही आ जाना...। बस तुम यूं ही आ जाना...।
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।। एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।।
मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था... मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था...
पात पात प्रतीति परिभाषित, है तुम बिन फागुन अभिशापित। पात पात प्रतीति परिभाषित, है तुम बिन फागुन अभिशापित।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
तुम्हारे अंदर वो तमाम रद्द-ओ-बदल जो तुमने सिर्फ़ मेरे लिए किये उनका आभार जता सकूँ मै तुम्हारे अंदर वो तमाम रद्द-ओ-बदल जो तुमने सिर्फ़ मेरे लिए किये उनका आभार ...
पहली मुलाकात और उसकी खुशियां, याद करें-आप भी तो साझेदार थे। पहली मुलाकात और उसकी खुशियां, याद करें-आप भी तो साझेदार थे।
तुम्हारी यादों के सफ़र पर रोज रात निकल पड़ती हूँ। तुम्हारी यादों के सफ़र पर रोज रात निकल पड़ती हूँ।
गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर... गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर...
जब कभी धीमी हवा मुझे छू कर बहती है, तब पता नहीं क्यों मेरे दिल में कहीं बेचैनी सी हो जब कभी धीमी हवा मुझे छू कर बहती है, तब पता नहीं क्यों मेरे दिल में कहीं...
मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास... मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास...
थोड़ी सी ख़ामोशी मुझे है स्वीकार ... अतिशयोक्ति में डूबा हुआ नहीं चाहिए प्यार ! थोड़ी सी ख़ामोशी मुझे है स्वीकार ... अतिशयोक्ति में डूबा हुआ नहीं चाहिए प्यार !
मुझे अपने कलम की स्याही में सुरक्षित कर लो, मुझे शब्दों की सशक्त श्रृंखला में हीरे सा मुझे अपने कलम की स्याही में सुरक्षित कर लो, मुझे शब्दों की सशक्त श्रृंखला में...