STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

4  

Sudhir Srivastava

Abstract

इंसाफ

इंसाफ

1 min
436

मानव अब खुद को

भगवान है,

तभी तो ईश्वरीय व्यवस्था में

अवरोध खड़े करता है,

भगवान को जो करना है

अब मानव करने लगा है।


उसे ईश्वर पर भरोसा नहीं रहा

तभी तो वो अपने तराजू पर

इंसाफ तौल ही नहीं रहा

इंसाफ भी खुद ही कर रहा।


किसी को जीवन तो दे नहीं सकता

मगर अपने स्वार्थ की खातिर

लोगों को इंसाफ के नाम पर

सरेआम मौत दे रहा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract