Kumar Sonu
Action
इंकलाब अमर रहे
भारत के भाल पर हिमालय
रूपी ताज अमर रहे
दुनिया के हर कोने में
इस हिंद का राज अमर रहे
जब भी पड़ी जरूरत
हम बन कर शेर दहाड़े हैं
मगर गंगा की लहरों में
शांति का साज़ अमर रहे
इंकलाब अमर रहे !
इंकलाब
इन्कलाब
तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ। तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ।
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन बन पायेंगे। आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन...
मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रहा है मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रह...
मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर
मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ। मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ।
सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप
राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी। राष्ट्रपति की बग्घी हमारे लिए बहुत उत्सुकता का कारण होती थी।
असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥ असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥
मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे के सर आयी, मनु जबकि मात्र 4 बरस की तभी माता का संग छूटा, जिम्मेदारी मनु की पिता तांबे क...
कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ। कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ।
सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश
नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे। नौजवानों इस वतन का कल है हाथों में तुम्हारे।
बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत टकराव नही विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत ...
संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख दिए होंगे संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख द...
अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।। अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।।
हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे। हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे।
हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता