STORYMIRROR

Kumar Sonu

Action

2  

Kumar Sonu

Action

इंकलाब

इंकलाब

1 min
348

इंकलाब अमर रहे

भारत के भाल पर हिमालय


रूपी ताज अमर रहे

दुनिया के हर कोने में


इस हिंद का राज अमर रहे

जब भी पड़ी जरूरत


हम बन कर शेर दहाड़े हैं

मगर गंगा की लहरों में


शांति का साज़ अमर रहे

इंकलाब अमर रहे !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Kumar Sonu

Similar hindi poem from Action