STORYMIRROR

Abhishek Singh

Abstract

2  

Abhishek Singh

Abstract

ईश्वर

ईश्वर

1 min
255

जो कण कण में है।

जिससे जीवन है।

जिससे मरण है।

जो सर्वत्र है।

जो पवित्र है।

जिसका स्वरूप अनंत है।

जिसका अंश प्रेम है।

जिसका दूसरा रूप,

माता और पिता हैं।

वही तो ईश्वर हैं !

वही तो ईश्वर है !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract