STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Inspirational

4  

Sudhir Srivastava

Inspirational

ईश्वर की व्यवस्था

ईश्वर की व्यवस्था

1 min
406

आज सुबह हुई और शाम भी हो गई

रात भी अंगड़ाइयां लेने लगी,

फिर सुबह होने की चिंता 

अभी से क्यों होने लगी?

सुबह होगी या नहीं

यह सोचना तो हमारा काम नहीं

क्या आज की सुबह या शाम होने में

हमारा कोई योगदान था

नहीं न, फिर इतनी बेचैनी क्यों

जब हमें यह भी नहीं पता

कि कल का सूरज हम देखेंगे भी या नहीं

फिर सुबह होने की हमें चिंता क्यों?

अच्छा है इतना बेचैन न होइए

खुश रहिए, मस्त रहिए

ईश्वर का धन्यवाद कीजिए

आज की सुबह, शाम के लिए

अपने होने के लिए,

कल का कल देखेंगे

हम होंगे तो सुबह भी देखेंगे

फिर ईश्वर का धन्यवाद करेंगे

बेकार की उलझनों में हम नहीं फंसेंगे।

ईश्वर की व्यवस्था में

व्यवधान नहीं बनेंगे

न ही शंका या सवाल करेंगे

सुकून की सांस निश्चिंतता से लेंगे। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational