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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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नारायण की लीला न्यारी

नारायण की लीला न्यारी

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सरसी छंद (१६, ११) - नारायण  की लीला  न्यारी नारायण   की  लीला   न्यारी, कहते  मुनिजन  संत। इनके  चरणों  में जो  झुकता, पावै  सुखद  अनंत।। मिटते   सारे  कष्ट   हमारे,       उतरें  भव  से  पार। पाप-पुण्य  की  कथा  कहानी, देती  जीवन  तार।। प्रभु  नाम  है  सबसे  प्यारा,   जपता  सब  संसार। श्रद्धा अरु विश्वास  सहारे, भव  बाधा  सब  पार।। जीवन अपना आप बिताओ, नारायण धरि ध्यान। नहीं छिपा  है इसके  पीछे, कोई  अलग  विधान।। ईश नाम है  सबसे  प्यारा,  सबको  इतना  ज्ञान। नहीं  चाहते  हैं  प्रभु  मेरे, माँग  व्यर्थ  अनुदान।। राम -कृष्ण बनकर के आये, लिया धरा अवतार। कष्ट मिटाया  जन मानस का, कर दुष्टन संहार।। सुधीर श्रीवास्तव 


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