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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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मन में है माया का डेरा

मन में है माया का डेरा

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मन में है माया का डेरा इसमें नया और अजूबा क्या है? मन में माया का ही तो डेरा है, इस बीमारी ने बहुतों को घेरा है। यह मुझे पता ही नहीं था, भला हो यमराज का जिसने मुझे आज ये ज्ञान दिया, बदले में सिर्फ मेरे घर की एक कप चाय पिया। यमराज ने मुझे समझाया - प्रभु! ये है कलयुग की माया जिसने जन-जन को भरमाया। यह और बात है कि तमाम कोशिशों के बाद भी आपसे उसका दाल नहीं गल पाया, जिसका उलाहना लेकर वो मेरे पास था आया मगर क्या कहूँ बेचारा मुँह की खाया और उसके भी मन में माया ने अपना डेरा जमाया। उसकी बात सुन मैंने उसकी पीठ थपथपाया और अगली फुर्सत में दावत पर बुलाया इतना सुन श्रीमती जी को गुस्सा आया और तब तक मेरा यार जाते हुए दूर नजर आया। सुधीर श्रीवास्तव 


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