मेरा शब्द मेरा दृष्टिकोण
मेरा शब्द मेरा दृष्टिकोण
मेरे शब्द मेरा दृष्टिकोण ********* मेरे शब्द, सिर्फ मेरे हैं जिस पर सिर्फ मेरा अधिकार है मेरा विचार, मेरा दृष्टिकोण, मेरा चिंतन है, किसे अच्छा लगता है और किसे नहीं कौन पढ़ता है और कौन नहीं इसका तनाव मैं बिल्कुल नहीं लेता। बेवकूफ हूँ क्या? अरे इतना श्रम करता हूँ तब जाकर कुछ लिखकर परोस पाता हूँ, शब्दों को जोड़ता गाँठता हूँ फिर भावों की चाशनी लगाता हूँ, वैचारिक बुरादे डालता हूँ, रंग बिरंगे डिब्बे में सलीके से सजाकर पैक करता हूँ। बावजूद इसके आपको पसंद न आये रस न मिले, तो मैं क्या कर सकता हूँ सिवाय इसके कि आपको नासमझों का राष्ट्रीय खिताब दे सकता हूँ, या फिर यमलोक रत्न दिलवा सकता हूँ। स्पेशल आभार के तौर एक विशेष सुविधा जरुर दिलवा सकता हूँ अपने मित्र यमराज से सशुल्क आपकी आमने-सामने मुलाकात करवा सकता हूँ, इससे ज्यादा की उम्मीद मुझसे रखना भी मत वरना अपनी मित्रता की लिस्ट से बाहर भी कर सकता हूँ, इसके लिए अग्रिम शुभकामनाएं अग्रिम दे सकता हूँ। सुधीर श्रीवास्तव
