करने को अंकित कुछ अपने निशाँ आज क़लम पुनः मैं उठाता हूँ । करने को अंकित कुछ अपने निशाँ आज क़लम पुनः मैं उठाता हूँ ।
आहिस्ता आहिस्ता पहली दफा हमें भी इश्क हुआ। आहिस्ता आहिस्ता पहली दफा हमें भी इश्क हुआ।
एक प्राचीन प्रथा, एक स्त्री की व्यथा बहुत पहले हमारे राजस्थान की कथा। एक प्राचीन प्रथा, एक स्त्री की व्यथा बहुत पहले हमारे राजस्थान की कथा।
जल छू के लो प्रण, बुन डालो मधुर तरंगिनि। जल छू के लो प्रण, बुन डालो मधुर तरंगिनि।
हर शस्त्र मेरा तीव्र ,तीक्ष्ण जिसका प्रमाण ये संसार! हर शस्त्र मेरा तीव्र ,तीक्ष्ण जिसका प्रमाण ये संसार!
मैं हूँ जैसी...। मैं हूँ जैसी...।