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Vimla Jain

Tragedy Action Children

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Vimla Jain

Tragedy Action Children

ईश्वर की माया

ईश्वर की माया

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 एक तरफ पकवानों से भरी थाली, शादियों में झूठा फेंकते लोग,

मंदिरों में प्रसाद चढ़ाते लोग, मणों दूध आस्था के नाम पर बहाते लोग,

पर वही दूध किसी भूखे बच्चे को देने में सकुचाते लोग।

 मैंने देखा है ईश्वर के दरबार में, जहाँ भक्ति से अधिक सिक्कों की गूंज सुनी,

चढ़ावे की कतारें देखीं, पर भूख से तड़पते बच्चों के लिए किसी का दिल नहीं पसीजा।

 मैंने भी ईश्वर के दरबार में सिर झुकाया, पर वहाँ धन अर्पण नहीं किया, वही पैसा बाहर,

भूखे बच्चों के लिए अन्न बनाकर रख आई।

 ईश्वर से बढ़कर उनके मासूम चेहरे पर आई मुस्कान को पाया।

 एक तरफ भूख से बिलबिलाते मासूम, जो बासी टुकड़ों में भी जीवन खोजते हैं,

जो झूठे-सुखे ब्रेड के कण आपस में बाँटकर खा लेते हैं।

 हे ईश्वर! यह कैसा अन्याय? जहाँ एक ओर अन्न का अपमान, और दूसरी ओर भूख से मरते इंसान!

 मेरी प्रार्थना है— कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी की भूख से मौत न हो!



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