Shamim Shaikh
Tragedy
मेरा नाम हवलदार
हवलदार भगत है
कर लो चाँद फ़...
जन्म दिन मुबा...
परिश्रम ही पू...
बचपन का सफ़र!
मुकम्मल मौत
ईद आने वाली ह...
हॅपी बर्थ-डे ...
वन्दे मातरम!
वो भी तो हिस्सा है उसी तिरंगे का। वो भी तो हिस्सा है उसी तिरंगे का।
पर कैसी यह चाल चली ? जंजीरों में जकड़ दिया ! पर कैसी यह चाल चली ? जंजीरों में जकड़ दिया !
पसीने का कभी सीमेंट हम लगने नहीं देते। पसीने का कभी सीमेंट हम लगने नहीं देते।
आज हमारे लिए उनके पास वक्त ही नहीं है, जिनको वक्त की अहमियत हम ही सिखाते हैं। आज हमारे लिए उनके पास वक्त ही नहीं है, जिनको वक्त की अहमियत हम ही सिखाते हैं।
जिनके नाम पर सहानुभूति लेकर देश प्रदेश हुआ जाता है। जिनके नाम पर सहानुभूति लेकर देश प्रदेश हुआ जाता है।
यह सरहदें फिर किसके लिए है क्यों वो जान हथेली पर लिए है यह सरहदें फिर किसके लिए है क्यों वो जान हथेली पर लिए है
लड़कियां, लड़कियां ही रहेंगी वहीं बेड़ियों के साथ। लड़कियां, लड़कियां ही रहेंगी वहीं बेड़ियों के साथ।
करते टीवी पे बद ज़ुवानी फंसादात मुबारक हो। करते टीवी पे बद ज़ुवानी फंसादात मुबारक हो।
तेरी याद ने मुझको बहुत है रुलाया। तेरी याद ने मुझको बहुत है रुलाया।
जैसी तैसे कट गई अपनी छाँव देना फिर भी छोड़ेंगे नहीं। जैसी तैसे कट गई अपनी छाँव देना फिर भी छोड़ेंगे नहीं।
आम आदमी इनके जाल में फँसकर भटक रहा है। आम आदमी इनके जाल में फँसकर भटक रहा है।
जवाब मिलने तक सोचते रहें मेरा नाम एम्बेसडर है। जवाब मिलने तक सोचते रहें मेरा नाम एम्बेसडर है।
बंद कोई खिड़की हूं मैं हाँ एक लड़की हूँ मैं। बंद कोई खिड़की हूं मैं हाँ एक लड़की हूँ मैं।
किन्तु ये भी सत्य है कि वो मरा नहीं है मारा गया है उसे मारा है किन्तु ये भी सत्य है कि वो मरा नहीं है मारा गया है उसे मारा है
उन बच्चों के जीवन का ये सफर नहीं आसान था लाए थे वो इतनी ही साँसें इससे घर उनका अनजान उन बच्चों के जीवन का ये सफर नहीं आसान था लाए थे वो इतनी ही साँसें इससे ...
तुम से भी ना कुछ बोलूँ तो फिर मैं किससे अपनी बात कहूँ। तुम से भी ना कुछ बोलूँ तो फिर मैं किससे अपनी बात कहूँ।
जहाँ सोते थे कई सितारे उसके साथ और चाँद दिया करता था पहरा सारी रात। जहाँ सोते थे कई सितारे उसके साथ और चाँद दिया करता था पहरा सारी रात।
ग़लती सिर्फ इतनी सी थी मेरी, किसी पे मैंने इन्सां होने का भरोसा किया था, ग़लती सिर्फ इतनी सी थी मेरी, किसी पे मैंने इन्सां होने का भरोसा किया था,
न लगा तू मुझ पे तोहमतें, हूँ तो में आखिर इंसान ही। न लगा तू मुझ पे तोहमतें, हूँ तो में आखिर इंसान ही।
समाज में और भी बेटियां है अपने-अपने बाबुल के घर। समाज में और भी बेटियां है अपने-अपने बाबुल के घर।