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Jyoti Mishra

Tragedy

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Jyoti Mishra

Tragedy

हसरतें

हसरतें

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मेरी हसरतें

तमाम रातों में दबती गईं।

रूह में सूनापन बनकर उतरती गईं।

स्वप्नों का अधिकार न रखती 

ये आँखें

आँसुओं में खुद को भिगोती गईं।

छुटपन की यादें मेरे हाथों से हरपल

रेत बनकर फिसलती गईं ।

जो कभी

रश्क किया करते थे अपनी नसीबी पर

हरपल बदनसीबी में वो तब्दील होती गईं।


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