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सतीश मापतपुरी

Abstract

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सतीश मापतपुरी

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होली की बधाई

होली की बधाई

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होली के रंगों में 

ऐसी मस्ती जो

भर जाती अंगों में।


गोरी के अँचरा पे 

पवन मचल जाता

नयनों के कजरा पे।


लबों पे पसीना है 

पोंछ दुप्पटे से

रंग का  महीना है ।


छुप के निकली गोरी 

 रंग लिए बैठा

की जम के बरजोरी।


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