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Pritam Pandey

Abstract

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Pritam Pandey

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होली का त्योहार

होली का त्योहार

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बस रंगों का त्योहार हैं होली

ढंगों  का त्योहार हैं होली

मिलजुल जाए आपस मे सारे

ऐसा यहीं इक़ त्योहार हैं होली


करती फिज़ा रँगीन हैं होली

बदलतीं रंग हिज़ा* भी होली

धरती अम्बर एक सा करती

मौसम खिज़ा** की होती होली


खाते सब क्यूँ भाँग की गोली

उलटी सीधी बात और बोली

बेढंगे करतूत से अब अपने

बना दिये त्योहार बम गोली


ना मत इसको बदनाम करो

बस रंग अबीर के नाम खेलो

ये पर्व हैं प्यार और उन्नति का

बोली जुआ में ना बरबाद करो।


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