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VIVEK ROUSHAN

Abstract

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VIVEK ROUSHAN

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हो रहे ,तो हो रहे

हो रहे ,तो हो रहे

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मुझे तुम्हीं से प्यार हो, तो हो रहे ,तो हो रहे 

तुम्हें इससे इंकार हो, तो हो रहे , तो हो रहे 


तुम्हें मिली है रौशनी , मुझे मिली आवारगी 

मुझसे तुम बे-जार हो, तो हो रहे ,हो रहे


तुम से क्यूँ खफा रहें, क्यूँ तुम्हें बेवफा कहें 

तुम बन गए अग्यार हो, तो हो रहे ,तो हो रहे 


मुझे है खुद खबर मेरी, कठिन बहुत डगर मेरी 

घना जो अंधकार हो, तो हो रहे ,तो हो रहे 


दिये की लौ में जला , गमों के साए में पला 

फिर भी मेरी हार हो, तो हो रहे ,तो हो रहे ।


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