STORYMIRROR

संतोष शानू

Romance

4  

संतोष शानू

Romance

हमें तुम्हारा बना गया

हमें तुम्हारा बना गया

1 min
331

हमें तुम्हारा

 बना गया

 तुम्हारा अनछुआ स्पर्श ही

मुझे अपना बना गया 

बिना किसी अनुबंध के

 उसे तुम्हारा बना गया

 तन की नजदिकियां

 बहुत ही कम थी 

फिर भी तुम्हारी बाहों का

 सहारा हमें किनारा दिला गया

 रात जब भी लगी 

कुछ बोझिल सी

 तुम्हारा स्वप्न ही मुझे

 सुबह का उजाला दिखा गया 

मेरे कांपते अंधेरों पर

 तुम्हारे अधर जब भी पड़े

 मुझे जीने का वह एक 

नया नजारा दिल आ गया

 तुम को समर्पित है मेरा

 सर्वस्व तन और मन

 तुम्हारे प्रणय का अंदाज मुझे में

एक नया एहसास जगा गया. 


Rate this content
Log in

More hindi poem from संतोष शानू

Similar hindi poem from Romance