हमें तुम्हारा बना गया
हमें तुम्हारा बना गया
हमें तुम्हारा
बना गया
तुम्हारा अनछुआ स्पर्श ही
मुझे अपना बना गया
बिना किसी अनुबंध के
उसे तुम्हारा बना गया
तन की नजदिकियां
बहुत ही कम थी
फिर भी तुम्हारी बाहों का
सहारा हमें किनारा दिला गया
रात जब भी लगी
कुछ बोझिल सी
तुम्हारा स्वप्न ही मुझे
सुबह का उजाला दिखा गया
मेरे कांपते अंधेरों पर
तुम्हारे अधर जब भी पड़े
मुझे जीने का वह एक
नया नजारा दिल आ गया
तुम को समर्पित है मेरा
सर्वस्व तन और मन
तुम्हारे प्रणय का अंदाज मुझे में
एक नया एहसास जगा गया.

