Somya Agrawal
Classics
ह से हिंदी
हमारी बिन्दी।
ह से हस्ती
हमारी किवदंती।
ह से हिन्दुस्तान
हमारी पहचान।
ह से हँसना
सबको अपना बनाना।
ह से हाथ
सबका साथ।
ह से हंस
सबकी पसंद।
ऑलराउंडर विमे...
बेपनाह कोविड ...
यादें~~~~~~
सर्दी का मौसम...
ख्वाबों के मन...
हिन्दी दिवस
आज़ादी
मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे।
सुग्रीव का मंत्री था वो और भाई था मैन्द का। सुग्रीव का मंत्री था वो और भाई था मैन्द का।
ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बंद हो गई नाग और चन्... ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बं...
हे मित्र पूर्ण करने को तेरे मन की अंतिम अभिलाषा। हे मित्र पूर्ण करने को तेरे मन की अंतिम अभिलाषा।
श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें। श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें।
किससे लड़ने चला द्रोण पुत्र थोड़ा तो था अंदेशा, तन पे भस्म विभूति जिनके मृत्युमूर्त रूप। किससे लड़ने चला द्रोण पुत्र थोड़ा तो था अंदेशा, तन पे भस्म विभूति जिनके मृत्युम...
महा युद्ध होने से पहले कतिपय नियम बने पड़े थे, महा युद्ध होने से पहले कतिपय नियम बने पड़े थे,
मेरे भुज बल की शक्ति क्या दुर्योधन ने ना देखा? मेरे भुज बल की शक्ति क्या दुर्योधन ने ना देखा?
न हूँ मैं मेधा, न बुद्धि ही मैं हूँ। अहंकार न हूँ न चित्त ही मैं हूँ। न हूँ मैं मेधा, न बुद्धि ही मैं हूँ। अहंकार न हूँ न चित्त ही मैं हूँ।
वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में। वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में।
हर इस चक्रव्यूह में से होकर, खुद अभिमन्यु को ही बाहर आना है। हर इस चक्रव्यूह में से होकर, खुद अभिमन्यु को ही बाहर आना है।
पड़ा हुआ था दुर्योधन होकर वन पशुओं से लाचार, कभी शिकारी बन वन फिरता आज बना था वो शिकार। पड़ा हुआ था दुर्योधन होकर वन पशुओं से लाचार, कभी शिकारी बन वन फिरता आज बना था ...
भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ। भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ।
कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल । कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल ।
क्या तीव्र था अस्त्र आमंत्रण शस्त्र दीप्ति थी क्या उत्साह। क्या तीव्र था अस्त्र आमंत्रण शस्त्र दीप्ति थी क्या उत्साह।
कृष्ण बलराम दंगल को देखने रंगभूमि की और चल दिए । कृष्ण बलराम दंगल को देखने रंगभूमि की और चल दिए ।
पद का अपने घमंड था उनको अपने को त्रिलोकी का ईश्वर मानते। पद का अपने घमंड था उनको अपने को त्रिलोकी का ईश्वर मानते।
उसी समय श्री कृष्ण आ गए माँ के पास दूध पीने के लिए। उसी समय श्री कृष्ण आ गए माँ के पास दूध पीने के लिए।
किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित। किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित।