हाँ मैं भारत हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
वो नर जो भी
दया प्रेम करुणा
ममता में जीते हैं
अपना सर्वस्व निछावर कर
ओरो के हित में रहते है।
मिटा स्वयं को
राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते है
मानव धर्म के लिए
प्राणों की भी आहुति दे देते हैं।
वहाँ खड़ा मैं रहता हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
प्रेम तुम्हे सिखलाता हूँ।
लाख विपत्ति आई हो
और विघ्नों ने घेरा हो
मैं ना डिगतामैं ना डरता
खम ठोक सामना करता हू।
सभी परिस्थितियों से लड़कर
मैं हमेशा जीतता हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
धैर्य तुम्हें सिखलाता हूँ।
अनेक धर्म जाति भाषा वर्ण
विविधताओं से मैं भरा हुआ
मानवता ही सब गुणों में श्रेष्ठ
यह तुम्हें बतलाता हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
मानव धर्म सिखलाता हूँ।
सारी संस्कृति हो नष्ट अगर
सभ्यता भी खत्म हो जाए मगर
मैं भारत खड़ा अविचल
अपनी पवित्रता के बल पर
अनुशासन नियम धैर्य संयम
कर्म योग बल मेरा है।
अगणित गुणों के कारण ही
विश्वगुरु कहलाता हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
संस्कृति बोध कराता हूँ
सत्य अहिंसा का पाठ
जग को मैनें सिखलाया है।
उच्चता में जीने की
दानव को देवता बन जाने की
मानव-मानव ही नही
सभी चराचर जीवों के
प्राणों में मैं बसता हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
सत्य की राह दिखाता हूँ।
कठिन परिस्थितियों में हो जब जग
और जीवन सभी जीवों का
अर्पण कर अपना सर्वस्व
दिया मार्ग फिर जीने का
कठिन कठोर तपस्या यह
कर दूसरे के हित सब अर्पण
कर त्याग स्व काऔरों के हित
यह सिखलाता हूँ
हाँ मैं भारत हूँ
परोपकार तुम्हे सिखलाता हूँ।
दिए जो चेतना है मैंने
दिए है जो जीवन-नियम
अखिल विश्व को यहअपनाना होगा
सृष्टि को फिर से भारत बन जाना होगा
यह ना केवल मानवसम्पूर्ण पृथ्वी के हित होगा
जीव-जंतु जो भी जगत में सभी खुशियों में जीयेंगे
सभी को मैं यह याद दिलाता हूँ।
हाँ मैं भारत हूँ
जीवन मार्ग दिखाता हूँ।
