गुरू
गुरू
गुरु ही ईश्वर, गुरु ही स्वामी, गुरु ही सबका पालनहार
गुरु चरण को आज ही पकड़ो, गुरु ही सबका तारणहार||
सत मार्ग जो हमें दिखाता, करता सबका वो उद्धार
सुगमता से गुरु मिले न, कोशिश करता जग संसार||
काम, क्रोध संग इच्छा त्यागो, सेवा, समर्पण ले लो हाथ
गुरु की कृपा बड़ी कठिन है, सारे कर्मों का वो ही सार||
ढोंगियों की मैं बात न करता, ईश्वर का है गुरु अवतार
राग, द्वेष से योजन दूर जो, कांपता उससे नर्क का द्वार||
उगते सूरज सी उसकी छवि है, ज्ञान से देता सबको निखार
ज्ञान के चक्षु खोल हमारे, पाप कर्म से देता उभार||
शीश झुका कर नमन जो कर लो, पल में करता भवसागर पार
मान का उसके हनन न करना, गुरु की महिमा अपरंपार||
