STORYMIRROR

Rita Jha

Abstract Others

3  

Rita Jha

Abstract Others

गुरु

गुरु

1 min
184

धन्यवाद आपका मेरे जीवन के गुरु 

आपके आशीष से हुआ बौद्धिक जीवन शुरू।

कोरे पन्ने की तरह आपके पास आई थी,

अपनी विद्वत्ता पूर्ण व्यवहार से मैं गुनगुनाई थी।

जब तक नश्वर शरीर में प्राण का संचार रहेगा,

जब तक मेरा जीवन आपके कृत्य से ऋणी रहेगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract