STORYMIRROR

Anshumala .

Comedy

4  

Anshumala .

Comedy

गुलाम

गुलाम

1 min
295

भरी महफिल में बनाया 

तुुमने मुझेे बोर, फिर भी

बजाया मैंने ढोल जोर।


क्योंकि मैं तुम्हारा गुलाम हूँ,

तुम मेरे आका हो।

जो भी तुम हुक्मोगे 

सब मैं मेरे सर आँँखों

अगरतर नहीं मानी तो

तुम मुझे सज़ा देेना।


सज़ा भी नहीें मानी तो

मेरा सर कटवा देना 

मगर अगर सर ना कटी तो

समझ लेना सर धड़ सेे

फेविकोल से चिपका है

ओ मेरे आका।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Comedy