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Dr. Akansha Rupa chachra

Romance

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Dr. Akansha Rupa chachra

Romance

गुलाबी जज्बात

गुलाबी जज्बात

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कोई हमारा हुआ न दिल से,बस यही मलाल आया

फागुन मे उनकी याद से ,गुलाबी लबो पर नमी

चेहरे पर निखार आया।

नाम तेरा जुबां पर आया जब भी ये सवाल आया

शर्माती नजरो को तेरे दीदार, का ख्याल आया।


खता अजब, थी न हमने की पर सजा खूब पाई

अश्क़ की नदियाँ बहाई , तभी तो रुख पे जमाल आया l


आस थी कुछ सुकून की ज़िन्दगी की रह गुज़र पे

तोहफा गम का मगर हिस्से, में बेमिसाल आया l


ज़माने में सभी खुद के लिए ही तो जी रहे हैं

जो मिटे औरों की खातिर ऐसा जीने का हुनर l

आसान नही होता दुनिया मे जीना, सुख को पाना

आसान नही था।

धड़कन ,साँसे ,चैन, समय देकर भी सुख को नही

पाया।


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