STORYMIRROR

Krishna Khatri

Abstract

3  

Krishna Khatri

Abstract

गुड्डू बोला

गुड्डू बोला

1 min
375

एक बार की बात है 

जब तुम्हारी डांट पर

आ रहा था रोना मुझको 

एक तो काम बहुत था

 

तबीयत भी ठीक नहीं थी 

आने वाले थे मेहमान 

रात के खाने पर 

ऊपर से तुम्हारी डांट


बस मिल गया 

बहाना रोने का !


नहीं-नहीं बहाना नहीं 

सच में आ रहा था रोना 

बैठी थी यूं ही कि -

आकर गुड्डू बैठ गया


गोदी में मेरी

अपने नन्हे हाथों से 

पोंछे आंसू मेरे 

तुतलाते हुए बोला


आप हमाले अथे बते

हम आपके अथे बातें

ऐसे नई लोते !

बस मुझको आ गई हंसी 

रोते-रोते भी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract