गरीबी या लाचारी
गरीबी या लाचारी
इंसान को बहुत कुछ
सिखाती है गरीबी
कभी समजदारी, तो
कभी सिखाती लाचारी//१//
बहुत कुछ सहना पड़ता
देखके भी चुप रहना पड़ता
मन उड़ने का प्रयास करता
मजबूरी मे चुप रहता //२//
बुरी हालत में जीते हैं गरीब
खुद जाने खुद की तकलीफ
साथ उनका कोई देता नही
बात मन की कोई समझता नही//३//
बस एक होती उनकी कमजोरी
दूर नही होती गरीबी और लाचारी
खामोशी लेकर जीते हैं सब
कबतक इमतेहान लेगा रब //४//
