ग्लोब
ग्लोब
कितना सुंदर कितना प्यारा।
छोटा सा है गोला यह घूमता। अपनी धुरी पर।
समझाता पृथ्वी है गोल जो घूमती अपनी तक धूरी पर।
पूरी पृथ्वी का चक्कर।
विशाल कितनी विशाल।
है यह पृथ्वी उसको इतना अच्छा समझाता ।
हर किसी को समझ में आए ऐसी है यह सुंदर रचना ।
जिसने इसको इजाद किया।
धन्यवाद के पात्र हैं वह।
जिसने पृथ्वी से रूबरू हर किसी को करवाया।
हर बच्चा भी जानता
कि यह ग्लोब है।
यह है हमारी पृथ्वी
सब ग्रहों से न्यारी पृथ्वी।
इस ग्लोब में हम ढूंढते अपनी सरजमीन को,
जो है हमारी जन्मभूमि।
हमारी कर्म भूमि।
जिसको हम करते तहे दिल से प्यार और सलाम।
है नमन हमारा इस पृथ्वी को जिस में समाया हमारा वजूद।
