घर का दीया.. !
घर का दीया.. !
जा रहे हो
कहाँ... ?
दीया जलाने,
मंदिर में..!
जरा ठहरो...!
एक दीपक पहले,
घर की दहलीज़
पर जलाओ,
एक दीया
घर के आँगन में
लगी तुलसी में...।
एक दीपक जलाओ
अपने अंतस के
तम को दूर करने
के लिये,
जलाओ दीपक एक
अपने आशियाने में
फैले अंधकार को
दूर करने के लिए...।
जरा सोचो...
देवालय में जो
दीपक जलेगा
क्या वह इंसानियत का होगा...?
पहले,
एक दीपक जलाओ
इंसानियत के नाम का,
प्यार एवं विश्वास का
आपसी भाईचारे का,
और...
एक दीपक जलाओ
आत्मज्ञान का...।
मिटाओ पहले,
समाज में फैले,
भूख, आभाव, अमानवता
तथा वैमनस्य के अंधियारे को,
फिर जाना...
दीया जलाने मंदिर के
चौखट पर...।
जा रहे हो...
कहाँ...
दिया जलाने
मंदिर में...।
Aishani
