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Ullas Pandey

Romance

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Ullas Pandey

Romance

ghazal ,romance

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जमीं पे बैठकर पत्थर तराशता हूं मैं

वो इक मूरत जिसे दिनभर संवारता हूं मैं


कमाल शख़्स है वो बात भी नहीं करता 

कमाल ये भी ,उसे हर पल पुकारता हूं मैं


वो तो आंसू भी मेरे पोंछने नही आता

कभी जब उसके गिरे तो संभालता हूं मैं

 

मेरे अपनों से मिरा ना जानें कैसा बैर है

जो अपने आप को हर दिन बिगाड़ता हूं मैं।


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