एक संदेश युवाओं के नाम
एक संदेश युवाओं के नाम
कहते हैं कि बद्दुआ तेजाब बनकर जला
देती है,गुनाहों के दरखत को।
इंसान क्या भगवान भी माफ नहीं करता,
दुष्कर्म जैसी हरकत को।
अश्क लहू बनकर बहते हैं,
बेटियों की आंखो से दिन-रात।
माफी के काबिल नहीं,
दुष्कर्म जैसा अपराध।
दुष्कर्म की ये गलती ए दोस्तो,
बना देती है आंसुओं का तालाब।
हासिल सच्चे दिल से किया जाता है
सब-कुछ,कुचलने के लिए नहीं होते गुलाब।
ये दुष्कर्म का खौफ मजबुर करेगा एक दिन,
बेटियों को रहने के लिए चार दिवारी के भीतर।
बुरी सोच हमारी बदनाम कर देती है,बेटियों का चरित्र।
इस आजाद वतन में बेटियों
की इज्ज़त,क्यों आजाद नहीं।
बुरी आदत छोड़ दोगे अगर,
होगा कोई विवाद नहीं।
बेटी जब घर से निकलती अकेली।
माता-पिता का दिल धड़कता है
वो बेटी अपनी हो या सौतेली।
आजादी से जीने का,बेटियों को भी हक है।
बिन शिक्षा के जिंदगी,बेटियों की नरक है।
सलाम हम करते हैं उन बेटियों को,
जिसने जमाने में ऊंचा नाम किया।
हजारों मुश्किलों को सहकर,
हासिल सच्चा मुकाम किया।
फूलों की बरसात होती है उनके,
माता-पिता की राहों में।
जो सच्चे सपने सजाते हैं,
बेटियों की निगाहों में।
कामयाबी बचकर जाएगी कहां,
वो एक दिन बुला लेती है अपनी पनाहों में।
बुरी सोच हर इंसान को बदलनी पड़ेगी,
नफरत शिवाय कुछ नहीं गुनाहों में।
हमारी छेड़खानी ए दोस्तो,बन जाती है तमाशा।
किसी का चरित्र बदनाम कर देती है,अच्छा खासा।
गुनाहों की दलदल में अक्षर,कांटे ही मिलते हैं।
जुर्म के हिस्से किसी संग, बांटे नहीं जाते हैं।
वक्त हर किसी को म1का देता है, अच्छे कर्म करने का।
कोई प्रयास न करे ए यारो,दुष्कर्म करने का।
कुछ करना है तो वतन के लिए, करके जाओ।
हर बुराई को कह दो अलविदा,
बस वतन पे जां निसार करके जाओ।
