STORYMIRROR

rakesh kumar

Romance

2  

rakesh kumar

Romance

एक रिश्ता वो भी

एक रिश्ता वो भी

1 min
170

सुनो… सुनो न!

कुछ तुम बदलो,

कुछ हम बदलें

और बदल के इस

रिश्ते को

ढेर सारा प्यार देते हैं !


चलो न, वक़्त रहते

इस रिश्ते को सँवार लेते हैं!

जो ग़लतियाँ तुमने की हैं,

जो ग़लतियाँ मैंने की हैं!

साथ बैठके आज उन्हें

सुधार लेते हैं

चलो न, वक़्त रहते

इस रिश्ते को सँवार लेते हैं

प्यार तुम को भी है,

प्यार हमको भी है

आओ इस बात को

मन से स्वीकार लेते हैं!

चलो न, वक़्त रहते इस

रिश्ते को सँवार लेते हैं


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance