एक पहेली
एक पहेली
पौष मास की पितृ अमावस, रविवार की भोर
दो कम तीस पहेली क्रम ने,कीना ह्रदय विभोर
कीना ह्रदय विभोर देखी, कुरु महावीरों के संग
पंद्रहवर्षी उस किशोर की,अमिट इतिहासी जंग
ऐसा व्यूह बनाया उस दिन,कौरव सेना नायक ने
जो अभेध्य बतलाया था, समर ग्रंथ के गायक ने
भेध दिया था उसको भी इस किशोर के सायक ने
किया चक्र को अर्धचक्र,पार्थपुत्र "अभि" लायक ने
अब बतलाइये कि
कितने कुरुवीरों ने मिलकर, पार्थ पुत्र को मारा
क्रम से उनके नाम बताओ, यही है प्रश्न हमारा
रचा चक्रव्यूह गुरू द्रोणा ने, कौरव सेना नायक ने,
जो अभेद्य था बतलाया, समर ग्रंथ के गायक ने,
मची खलबली पांडु शिविर में, कौन भेद पाएगा,
कहा युधिष्ठिर से विनम्र हो , षोडष वर्षीय नायक ने।
मां के गर्भ में ही मैंने व्यूह भेदन जान लिया था,
उसी समय अपने पितु से यह अद्भुत ज्ञान लिया था।।
उत्तर
युद्धभूमि में अभिमन्यु ने, भीषण युद्ध किया था,
कौरव सेना भी घबराई, भीषण संहार किया था,
व्यूह केन्द्र में पहुंच गया, फिर किया युद्ध वो भारी,
घेर लिया कौरव दल ने, वह रहा सभी पर भारी,
अश्वत्थामा द्रोण दुशासन, कर्ण कृपा दुर्योधन,
कृतवर्मा शकुनि द्रुमसेना, वृषभसेन योद्धा जन,
टूट गया सब नियम युद्ध के, सबने वार किए थे,
एक निहत्थे बालक को सब मिलकर मार दिए थे।।
