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Nitu Arora

Abstract

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Nitu Arora

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एक दाता

एक दाता

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दाता एक

नाम अनेक,


ना बांटो

हिन्दू मुस्लिम

सिख, ईसाई,


हैं ये सब

भाई भाई

खून सभी का

लाल,


फिर क्यों

करते भेदभाव

पसंद सबकी

अपनी अपनी,


कोई खाता

हलवा पूरी

कोई खाता है

इडली,


इंसानियत को

रखो पहले

मिटा दो

सब झगड़े..।


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