STORYMIRROR

Rakhi Tandon

Abstract

4  

Rakhi Tandon

Abstract

एक बार फिर

एक बार फिर

1 min
337

ज़िंदगी के इन बिखरे पन्नो को

 समेट लेना तुम एक बार आकर

तुम्हारे अंदाज़ में वो कशिश 

नज़रंदाज़ करना जिसे मुश्किल है


अपनी उसी खिलखिलाती हंसी से

मेरे दामन को संवार देना तुम आकर

बिस्तर पर करवटे बदलते बदलते

यूं दर्द कभी कभी अंगड़ाई लेता है


उस दर्द का इलाज़ कर देना तुम आकर

प्यार तुम्हारा सहेज कर रखा है मैंने             

बचाने नज़र से दुनिया की

इल्तज़ा है तुमसे


हिफाजत कर लेना उस प्यार की तुम आकर

तुम्हारी फिक्र,तुम्हारा एहसास और 

मेरे लिए तुम्हारा मौजूद होना ही काफी है

सदा के लिए अपना बना लेना तुम आकर।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract