एक और क़दम
एक और क़दम
एक और कदम जिंदगी की ओर
खिला है फूल साखी का पतझड़ में
एक और कदम नये रास्ते की ओर
रोशनी आ रही है अब बंद चरागों से
एक और किरण सूरज की ओर
अब नहीं डरना है कँटीली राहों से
एक औऱ क़दम मंज़िल की ओर
मरुस्थल में करेंगे हरियाली कर्म से,
एक और कर्म खुशहाली की ओर
रोते को हंसाना है, अपनी हंसी से,
एक और कदम मुस्कुराहट की ओर
पत्थर पर चराग़ जला, भीतर लौ से,
एक और कदम अपनी रूह की ओर।
