STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

एक और क़दम

एक और क़दम

1 min
57

एक और कदम जिंदगी की ओर

खिला है फूल साखी का पतझड़ में


एक और कदम नये रास्ते की ओर

रोशनी आ रही है अब बंद चरागों से


एक और किरण सूरज की ओर

अब नहीं डरना है कँटीली राहों से


एक औऱ क़दम मंज़िल की ओर

मरुस्थल में करेंगे हरियाली कर्म से,


एक और कर्म खुशहाली की ओर

रोते को हंसाना है, अपनी हंसी से,


एक और कदम मुस्कुराहट की ओर

पत्थर पर चराग़ जला, भीतर लौ से,


एक और कदम अपनी रूह की ओर।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational