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Dr Suresh Kumar

Romance

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Dr Suresh Kumar

Romance

दूर बस दूर

दूर बस दूर

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ऋतुएं बदल रही हैं!

स्व -गति चल रही हैं!

बिना कोई लागलपेट!

सृजन या मटियामेट!


 गर्मी,बरसा व सर्दी!

बिना रंग -राग बेदर्दी!

ये मदमस्त ऋतुराज !

मिलन विरह अंदाज!


ठहरे गये दुख आकर!

बिन बात बतलाकर!

लेते न जाने का नाम !

गायब हुआ विश्राम!


चरम सुख जब होता!

गहन पीड़ा न्यौता!

फागुन हो या सावन!

 पार -परे मनभावन!


क्षणिक नहीं शाश्वत!

जो सनातन आश्वस्त!

परिधि से केंद्र आना!

"स्व" में ठहर जाना!



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