"दुःख देते बेटे और सुख देती बेटियां"
"दुःख देते बेटे और सुख देती बेटियां"
बेटी, तू है खुशियों की प्रेरणा,
हंसती है, गाती है, बनती है महकती सदा।
आंखों में छाया, मुस्कान की ज्योति,
अपनों के जीवन में खुशहाली रोशन करोती।
परंतु बेटा, तू तो है माँ-बाप का आश्रय,
उनकी जिंदगी का है आधार, उम्मीदों का निवास।
बेटी, तू है घर की रोशनी, बचपन की खुशबू,
उनकी सौभाग्यशाली धरोहर, उनकी आनंद की कविता।
एक छोटा सा बेटा, आँखों में चमक,
आनंद लाता था, गर्भ में जब था |
माँ की आगोश में सुरक्षित था सदा,
बेटे की मुस्कान थी हमेशा जगमग।
बचपन के खेलों में खोया दिन रात,
आनंद के साथ बिताए सभी पल साथ।
पिता के लिए वो बेटा होता था गर्व,
पिया को लगता था अपना भबिष्य अब सुरक्षित
पर जैसे उगते सूरज के साथ घाम,
बढ़ती थी चिंता, बढ़ता था काम।
बढ़ता जा रहा था दुःख का साया,
बेटा कर रहा था मन पर चोट गहरी |
इस दुःख-सुख के जीवन के बीच,
दिखलाई दिव्यता थी एक बेटी की मीठी मुस्कान में।
माँ ने सिखाया उसे आत्म-विश्वास का गीत,
बेटी बनी माँ की गरिमा का प्रतीक।
दुःख देते बेटे, सुख देती बेटियां,
प्यार और स्नेह की होती हैं अद्भुत विविधता।
बेटे और बेटियां, हमारी आनंद की स्रोत,
दोनों ही हमारे जीवन की हैं महिमा।
बेटे और बेटियों, हमारे आदर्श वीर,
हर पल हमेशा हमारे पास बनी रहें चिर।
उनका प्यार और सम्मान हमेशा बढ़ता रहे,
दुःख और सुख में वे सदैव साथी बने रहें।
बेटा भी खुशियां लाता है, पर दर्द भी दे जाता है,
सुन्दर सपनों को पल में अच्छा सा तोड़ जाता है।
पिता की आँखों में खिलखिलाहट देता है,
लेकिन छलांगों से दिल को दर्द भी देता है।
घर को आदर्श बनाना, परिवार की ताकत बनना,
उम्मीद के चिराग को हमेशा जला देती हैं बेटियां।
दुःख देते बेटे और सुख देती बेटियां,
जीवन की यह कठिनाई, मन को छू जाती हैं।
बेटा होता है गर्व की पहचान,
उसकी पालकी में उमंग होती है नियमन।
बेटियां आती हैं घर की आनंद बनकर,
मस्ती और हंसी से भर देती हैं जीवन को रंगकर।
बेटे और बेटियों में कोई अंतर नहीं होता,
मान-सम्मान और प्यार होता है दोनों को पूरा।
हर एक की ज़रूरत होती है समान,
बेटे और बेटियों के बिना अधूरा रहता है जीवन।
बेटा, तेरी मुसीबतें हैं भरी हुई,
सोते जागते तू है चिंतित रही।
बड़े होकर तूने तोड़े खिलौने,
माँ-बाप के दिल को किया रुलाने।
