दर्शन
दर्शन
मेरे अंत:करण के सम्मुख
एक ज्योतिर्मय चादर-सी लाकर।
दैनिक जीवन की सारी तुच्छता बिल्कुल
ओझल हो जाती है तेरी दर्शन पाकर।
सत्या का मन चाह रहा अपनी
परिपूर्णता तेरी गाथा गाकर।
अचरज-भरे तेरे रूप को प्रकट कर दे,
कि धन्य हो जाऊं तेरे दर्शन पाकर।
