Maneet Saluja
Abstract Inspirational Others
उसके क़र्ज़-ए-मुरव्वत को इस क़दर लौटाया जाएगा,
दऱख्त-ए-मेहरबाँ को इसकी इल्म-ओ-आगही ना थी।
दी जिस बशर-दोस्त को पनाह शुआ'-ओ-शम्स से,
वो ये कर्ज़ तबर से लौटाएगा, दऱख्त-ए-मेहरबाँ को इसकी मा'रिफ़त ना थी।
ला-फ़ानी
दऱख्त-ए-मेहरब...
तुम्हें दे सकूँ कुछ ए-दिल के मालिक, मैं कुछ भी तुमको देने के काबिल नहीं हूँ।। तुम्हें दे सकूँ कुछ ए-दिल के मालिक, मैं कुछ भी तुमको देने के काबिल नहीं हूँ।...
आईने में भी तन्हा हूँ मैं कितने बरसों से परछाई भी मेरी होकर मेरी क्यों नहीं है। आईने में भी तन्हा हूँ मैं कितने बरसों से परछाई भी मेरी होकर मेरी क्यों नहीं ह...
शायद तुम्हें अहसास नहीं है कि तुम सोचते बहुत हो। शायद तुम्हें अहसास नहीं है कि तुम सोचते बहुत हो।
स्टेटस देखते देखते खुद, हाई क्लास स्टेटस की, राह पर चलने लगता है। स्टेटस देखते देखते खुद, हाई क्लास स्टेटस की, राह पर चलने लगता है।
नाज़ जिसपे किया वो शख्स ही बेदम निकला साज़ बदले बहुत आवाज़ में बस ग़म निकला। नाज़ जिसपे किया वो शख्स ही बेदम निकला साज़ बदले बहुत आवाज़ में बस ग़म निकला।
बस करो अब बहुत ज्यादा होशियारी हो गयी दोस्तों से दुश्मनी दुश्मन से यारी हो गयी. बस करो अब बहुत ज्यादा होशियारी हो गयी दोस्तों से दुश्मनी दुश्मन से यारी हो गय...
वो जो रोज बात करती नहीं , वो जो बड़े बड़े उपहार रोज़ लाती नहीं। वो जो रोज बात करती नहीं , वो जो बड़े बड़े उपहार रोज़ लाती नहीं।
हर रिश्ते को अपना समझ इतराता था आज हर रिश्ता पास होकर भी दूर लगा। हर रिश्ते को अपना समझ इतराता था आज हर रिश्ता पास होकर भी दूर लगा।
बेवजह तो कुछ नहीं होता, बेवजह कोई किसी को नहीं खोता। बेवजह तो कुछ नहीं होता, बेवजह कोई किसी को नहीं खोता।
कितने ही नए रिश्ते बने, कितने ही रिश्ते टूट गए। कितने ही जो चाहने वाले, बीच सड़क में कितने ही नए रिश्ते बने, कितने ही रिश्ते टूट गए। कितने ही जो चाहने वाले, ...
शून्य पंचतत्व सुरलोक के उमंगों में शून्य विलीनता आत्मा शरीरों के मिलापों में..... शून्य पंचतत्व सुरलोक के उमंगों में शून्य विलीनता आत्मा शरीरों के मिलापों में....
बहन को विदा करने की चिंता में परेशान होता, रोता भी है, बहन को विदा करने की चिंता में परेशान होता, रोता भी है,
लोमड़ी जैसी कुटिलता बंदरों जैसी अस्थिरता पागल कुत्तों जैसी छीना झपटी लोमड़ी जैसी कुटिलता बंदरों जैसी अस्थिरता पागल कुत्तों जैसी छीना झपटी
यहाँ पत्थर के नुमाइंदे है यहाँ दिल की धडकनें भला कौन सुनता है। यहाँ पत्थर के नुमाइंदे है यहाँ दिल की धडकनें भला कौन सुनता है।
थोड़ा तो इनके बातों में सरकार को हामी भरना होगा। थोड़ा तो इनके बातों में सरकार को हामी भरना होगा।
झूम झूम यूँ धरती गाती गीत रे, जब धरा पर रिमझिम बरसे प्रीत रे. झूम झूम यूँ धरती गाती गीत रे, जब धरा पर रिमझिम बरसे प्रीत रे.
मैं भी किस्मत का रोना रोता हूं किस्मत को अपनी अक्सर कोस लेता हूं, मैं भी किस्मत का रोना रोता हूं किस्मत को अपनी अक्सर कोस लेता हूं,
आ गया सैलाब आँखों के काले काले बादलों से रुख़सारो की नरगिस गुलाबी वह साथ बहा ले गया। आ गया सैलाब आँखों के काले काले बादलों से रुख़सारो की नरगिस गुलाबी वह साथ बहा ल...
सारी मुसीबतों से लड़कर वक्त की आंच में तपकर सारी मुसीबतों से लड़कर वक्त की आंच में तपकर
साहित्य समाज का दर्पण , साहित्य है जहाँ भावों का आना जाना है। साहित्य समाज का दर्पण , साहित्य है जहाँ भावों का आना जाना है।