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Navneet Goswamy

Inspirational

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Navneet Goswamy

Inspirational

दो पहलू

दो पहलू

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जीवन का स्वरूप तो देखो

फिर स्वयं का दूजा रूप भी देखो।

कभी दरिया सा नम है जीवन

कभी लगे धरातल सूखा,

कभी हृदय से प्यार सा बरसे

और कभी अपनों से रहूं मैं रूखा ।


हर मन में दो पहलू रहते

और दोनो में द्वंद पनपते ।

संतुलन इनका करले जो मानुष,

फिर उसका सार्थक जीवन तो देखो।।

जीवन का स्वरूप तो देखो

फिर स्वयं का दूजा रूप भी देखो।


लाख कोशिशें नाकाम सी लगती

जितना इनको पकड़ में रखो।।

मगर, जिस मन इनकी लगाम कसी है

उसको फिर मंजिल पाते देखो।।

जीवन का स्वरूप तो देखो

फिर स्वयं का दूजा रूप भी देखो।

         



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