Abhijit Tripathi
Action
हमारी शान है हिमगिरि, हमारी मां तो गंगा है
मेरी भाषा अमर हिन्दी, हमारा ध्वज तिरंगा है।
यहां रमजान में राम, अली होली में बसते हैं
मगर मजहब की नफरत का हर रोज दंगा है।
रक्तबीज कोरोन...
आखिर में हम ज...
आया है फिर से...
क्या
तेरे साथ जीना...
गर तू मेरा नह...
तुझे मांग लेत...
मेरे ना होने ...
सोचते तो यही है हम देखते हैं कालखंड में लिखा है क्या। सोचते तो यही है हम देखते हैं कालखंड में लिखा है क्या।
जिनके अधरों पे मुस्कान सदा, मृत्यु को जीवन देते हैं जिनके अपने जीवन भर चौखट पे ऑंखें तकते हैं जिनके अधरों पे मुस्कान सदा, मृत्यु को जीवन देते हैं जिनके अपने जीवन भर चौखट पे ...
मोहब्बत के दिन नफरतों का धमाका मेरे यार देखो हुआ क्या, हुआ क्या ! मोहब्बत के दिन नफरतों का धमाका मेरे यार देखो हुआ क्या, हुआ क्या !
मंज़िल मिलेगी क्यों नहीं ! मंज़िल मिलेगी क्यों नहीं !
अभिनंदन सा, भारत के सपूत अभिनंदन सा..। अभिनंदन सा, भारत के सपूत अभिनंदन सा..।
धन्यवाद है आपका कि आपने हमको प्लेटफार्म दिया धन्यवाद है आपका कि आपने हमको प्लेटफार्म दिया
जिस दिन रूप धरा दुर्गा का, हर एक अपमान का बदला मैं लूँगी। जिस दिन रूप धरा दुर्गा का, हर एक अपमान का बदला मैं लूँगी।
आज यह तिरंगा अपने सपूतों को हवाओं की मीठी मीठी थपकियाँ दे रहा है। आज यह तिरंगा अपने सपूतों को हवाओं की मीठी मीठी थपकियाँ दे रहा है।
सौंप दिया है खुद को, देश को ये सरहद लाल कर जाऊँगा, खुद का हो या हो शत्रु का मैं इतना रक्त बहाऊँगा... सौंप दिया है खुद को, देश को ये सरहद लाल कर जाऊँगा, खुद का हो या हो शत्रु का म...
प्यार से अब लगा ले गले ले तेरे पास में आ गया। प्यार से अब लगा ले गले ले तेरे पास में आ गया।
खोई जिन्होंने अपनी संतान उन माता-पिता के चरणों में प्रणाम लिखूं। खोई जिन्होंने अपनी संतान उन माता-पिता के चरणों में प्रणाम लिखूं।
मैं मेट्रो से आ जाऊंगी और कार से उतरकर उस बच्चे को लेकर पास के एक ढाबे में पहुंची मैं मेट्रो से आ जाऊंगी और कार से उतरकर उस बच्चे को लेकर पास के एक ढाबे में पहुंच...
तू रस्ता रस्ता पर्वत कर मैं पर्वत पर्वत तोड़ूँगी तू इंसां इंसां दुश्मन कर मैं जन जन अपना खोजूँग... तू रस्ता रस्ता पर्वत कर मैं पर्वत पर्वत तोड़ूँगी तू इंसां इंसां दुश्मन कर म...
आज मैंने पर्वतों की चोटी पर अलग ही शोर देखा है आज मैंने पर्वतों की चोटी पर अलग ही शोर देखा है
फौलादी इरादे लिए, सियाचिन की बदन गला देने वाली, ठण्ड में भी डटे रहते हैं। फौलादी इरादे लिए, सियाचिन की बदन गला देने वाली, ठण्ड में भी डटे रहते हैं।
विस्मय की घड़ी हो,या खुशी का मंजर निश्छल बन, बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ना । विस्मय की घड़ी हो,या खुशी का मंजर निश्छल बन, बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ना ।
भारत माँ से बस ये विनती होगी कि रंगा रहे मेरा ये बासन्ती चोला। भारत माँ से बस ये विनती होगी कि रंगा रहे मेरा ये बासन्ती चोला।
और कुछ तुम कर न सको तो बस तिरंगे की आन बचा लेना उनके बलिदान का बदला तो सेना ले आएगी। और कुछ तुम कर न सको तो बस तिरंगे की आन बचा लेना उनके बलिदान का बदला तो सेना...
सोचते सोचते फिर शब्दों ने सुलझा दिया मन से निकली भाषा फिर शब्दों ने कविता बना दिया। सोचते सोचते फिर शब्दों ने सुलझा दिया मन से निकली भाषा फिर शब्दों ने कविता ब...
हमारी शिक्षा की प्रतिशत दर बढ़ी, सभ्यता आगे बढ़ी लेकिन हम बालश्रम को नहीं रोक है पाए हमारी शिक्षा की प्रतिशत दर बढ़ी, सभ्यता आगे बढ़ी लेकिन हम बालश्रम को नहीं...