STORYMIRROR

Sudershan kumar sharma

Inspirational

4  

Sudershan kumar sharma

Inspirational

दिवाली

दिवाली

1 min
395


जब भी जले मन से मन का दीप,

वो ही शुभ दिवाली है। 

सभ्यता और प्रेम की भाषा यहां बोली जाए,

हर बात न टटोली जाए

समझो शुभ दिवाली है। 

झगड़ा, नफरत, कपट

को खत्म कर दे जो अंधियारा

घर घर दीप जले जब प्यारा

तो समझो शुभ दिवाली है। 


गूंज हो मीठे बचनों की, 

रोशनी हो जब हवनों की

शोर भी लगे जब प्यारा

समझो शुभ दिवाली है। 


विष भी यहां अमृत सा हो

किसी के मन में धोखा न हो

हर मन पावित्र गंगाजल सा 

हो समझो शुभ दिवाली है। 


छोटे बड़े का आदरमान हो

हर नर नारी में ज्ञान हो

ईश्वर की तरफ ध्यान हो

जन जन में कल्याण हो

समझो शुभ दिवाली है।


भूखे प्यासे पर ध्यान हो

हर प्राणी के लिए छांब हो

बुजूर्गों पर विशेष ध्यान हो

समझो शुभ दिवाली है। 


आपस में न भेदभाव हो,

जात पात का अभाव हो

हर प्राणी से लगाव हो

समझो शुभ दिवाली है। 


सुन्दर सादा भेष हो,

भारत जैसा देश हो,

कुसंगति से परहेज हो,

यही जन जन को संदेश हो

समझो शुभ दिवाली है। 


हर आंगन में हरियाली हो

ऐसी सुदर्शन दिवाली हो

एक दूसरे से प्यार हो

जगमग करती रात हो

हर पल ऐसी सौगात हो

समझो शुभ दिवाली है। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational