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Satyendra Gupta

Abstract

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Satyendra Gupta

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दिल हमारा

दिल हमारा

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दिल हमारा एक दिन धड़क रहा था,

अपनी ही धड़कनों को गिन रहा था,

चेहरा हमारा एक दिन यू उदास था,

मुस्कुराते चेहरों को यू ही ढूंढ रहा था,


दिमाग हमारा एक दिन बहुत बेचैन था,

कुछ पहेलियों को यू ही सुलझा रहा था,

दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।


कुछ लोग जानकर भी अनजान बन जाते है,

सब कुछ समझकर भी नासमझ बन जाते है,

शिक्षित होकर भी अनपढ़ जैसा बन जाते है,

जहां कुछ बोलना हो वहां यू चुप रह जाते है,


न जाने जानकर भी अनजान यू बन जाते है

ऐसा था क्यू या ऐसे ही यूंही हो रहा था,

कुछ पहेलियों को यू ही सुलझा रहा था,

दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।


लोग कहते है सब्र का बांध टूट रहा है,

समुंद्र का उफान तेज सा हो रहा है,

क्या कहे बिन मौसम बरसात हो रहा है

सबके दिलों मे आग सुलग रहा है,


मानवधर्म नही मानव का धर्म बट रहा है,

एक दूसरे में मनमुटाव ज्यादा बढ़ रहा है,

ऐसा हुआ क्यू या ऐसे ही हो रहा था,

कुछ पहेलियों को यू ही सुलझा रहा था,

दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।



कुछ लोग खुशियों को खरीदना चाहते है,

हर चीज को पैसों से यू ही तौलना चाहते है,

घर ले आते है हर सुकून के वो चीज

जिनसे वो सुकून का अनुभव करना चाहते है,


कुछ दिन बाद उनसे भी मन भर जाता है,

गुजरे हुए वक्त को सहेजकर नही रख पाता है,

उम्र भी हर एक दिन यू ही गुजर रहा था,

कुछ पहेलियों को यू ही सुलझा रहा था,

दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।


जो रहते थे साथ हरदम हरवक्त छाया की तरह,

गीत गाते थे सुर मिलाकर जैसे गायक की तरह,

जब आया बुरा समय निकल गए गैरों की तरह,

वो छाया और गीत मेरे पास यू ही छोड़ गए वो,


जैसे जानते ही नहीं हो मुझे अनजान की तरह,

ये ऐसे ही होता है या यू ही ऐसे ही हो रहा था,

कुछ पहेलियों को यू ही सुलझा रहा था,

दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।


बिना कारण तो कुछ भी होता ही नही है,

बिना खौले दूध यू बाहर होता भी नही है,

आज तो हंसने के लिए पैसे देने पड़ते है,

सड़क पे कोई हो जाए जख्मी गिरकर,


उसे बचाने के बजाए फोटो लेने लगते है,

ये ऐसे ही होता है या यू ही ऐसे हो रहा था,

कुछ पहेलियों को यू ही सुलझा रहा था,

दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।


चाहकर भी चाह कुछ पूरा नहीं हो रहा था,

मंजिल पाकर भी मंजिल को ढूंढ रहा था

शुरू करू कहां से करू खत्म कहा से,

कोई कुछ तो कोई और कुछ बतला रहा था,


लोगो की सुनु या अपनी मन की करू,

दिल में ये सवाल बार बार दस्तक दे रहा था,

ये ऐसे ही होता है या यू ही ऐसे हो रहा था,

कुछ पहेलियों को यू ही सुलझा रहा था,


दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।

दिल हमारा एक दिन अजब धड़क रहा था।


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