STORYMIRROR

डॉ दीप्ति गौड़ दीप

Abstract

4  

डॉ दीप्ति गौड़ दीप

Abstract

दिल दुखाया करते हैं

दिल दुखाया करते हैं

1 min
545

जिंदगी में ऐसे भी मोड़ आया करते हैं

दिल लगाने वाले ही दिल दुखाया करते हैं।


गर्दिशों के मारों से कौन बात करता है

दोस्त भी मुसीबत में मुस्कुराया करते हैं।


मशविरा तो दे देना पर मदद मत करना

लोग एहसानों को भूल जाया करते हैं।


हम किसी से दुनिया में दुश्मनी नहीं रखते

लोग जाने क्यों हमको आज़माया करते हैं।


‘दीप’ कौन समझाए बेशऊर लोगों को,

बेवजह की बातों में वक्त जाया करते हैं।


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Abstract